Ashariri ।।। देह में रहते इस nashwar देह से उपराम देह में रहते paramdham की ऊंची स्थिति का अनुभव। जीवन मुक्त स्तिथि का अनुभव । Soul conciousness light sanskar है ,easy sanskar है अर्थात् Loose dress है अर्थात देह की conciousness (body conciousness)कम है। आत्मा देह से detached है,देह के संस्कारों से detached है अर्थात देह से detached है, अर्थात् paramdham की स्थिति में है,मुक्त अवस्था में है। Karmyogi स्थिति अभी अभी कर्म में आए,अभी अभी न्यारे कर्म करते second में कर्म से न्यारे कर्म हमें बांधे नहीं,उसके परिणाम से,अच्छे बुरे से हम बंध नहीं जाए। यह कब होगा ----जब कर्म करते sada हल्के होंगे,trustee भाव होगा,सेवा भाव होगा। कर्म संबंध में आएंगे,सुख ke संबंध में आएंगे,दुख के बंधन मे नही, क्यूंकि कर्म ही बंधन का भी कारण है और कर्म ही बंधन काटने का भी साधन है,सुख का भी आधार है। Detached होकर कर्म में आएंगे,अपनी देह से भी न्यारे,इन्द्रियों से भी न्यारे,उससे जुड़ी अपेक्षाओं से भी न्यारे। महिमा मिले,मान मिले,anek प्रकार की इच्छा...
अपनीnazro से baba उठाते हमने,,,रोज palko pe apni बिठाते hume ।।।meethe meethe मेरे लाडले बच्चे keh kar अपना सब hi लुटाते हमारे liye।।।आप baba है आए हमारे liye।।।स्वर्ग सौगात लाए हमारे liye।प्यारे अपने paramdham को छोड़ कर प्रेम में name अपने सभी छोड़ कर। ।। धरती हो या Gagan ho।।।madhuban hi या vatan ho।।।rehte कहीं भी baba ।।तुम्हें साथ अपने paye।।।हम पर तुम्हारे saaye।।।हम पर तुम्हारे saaye।।।शुभ भावनायें रखना हमको सीखा रहे ho।।।शुभ कामना की सेवा करना सीखा रहे ho।बनकर videdhi बाबा बनना हमने sikhaye।।।rehte कहीं भी baba तुम्हें साथ अपने paye। [: आपने baba हमने कितनी हसीन तकदीर di।।।जिंदगी जीने की हमको एक नयी tadbeer di।।।। [कभी दिल में कभी पलकों पर हमको बिठाते हो। jo हमको पढ़ते ho।।।।अपने से ऊंचा बनाने वाले baba।।अपने से आगे बढाने वाले बाबा । [: शिव बाबा को लगते प्यारे दिन रात जो सेवा में guzare।।।बनते वो shiv के नैन सितारे दिन रात जो सेवा में गुजारे। [: तुम सामने हमारे तुम पास हो...
स्वर्णिम युग की महिमा कितनी आलौकिक न्यारी,देवी देवताओं वाली दुनिया वहीँ है प्यारी सुखदायी जहा सूरज,चंदा शीतलता देता,वहां का हर सितारा शांति का दान देता। 16 कला से संपूर्ण सब रहते है नर नारी,देवी देवताओं वाली दुनिया यही है न्यारी इच्छा मात्रम अविद्या यहां सदा रहते,हर पल नहीं जीवन मे नही कमी रहती हीरे jawaharo के महल जहां निराले,पावन रहते सब ही पीते अमृत प्याले ताज तिलक तख्त से हर आत्मा रहे shringari
Comments
Post a Comment